ऊँटनी का दूध और मरुस्थलीय डेयरी: स्वास्थ्य और आमदनी का नया केंद्र

औषधीय गुणों से भरपूर ऊँटनी के दूध की माँग देश-विदेश में बढ़ी, थार के पशुपालकों को मिल रहा नया बाजार।

507 Head संपादकीय टीमUpdated: 12 अक्टूबर 202612 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन
रेगिस्तान में ऊँटों का झुंड

राजस्थान के राज्य पशु ऊँट को बचाने और पालकों की आय बढ़ाने में कैमल मिल्क (ऊँटनी का दूध) मील का पत्थर साबित हो रहा है। इसमें इन्सुलिन की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) के प्रयासों से अब स्थानीय स्तर पर पाश्चुरीकृत दूध, पाउडर और कुल्फी जैसे उत्पाद तैयार हो रहे हैं।

507 हेड के पशुपालकों का कहना है कि यदि संगठित दुग्ध संकलन केंद्र बन जाएं, तो ऊँट पालन एक बार फिर मरुस्थल की सबसे मजबूत आजीविका बन सकता है।

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