बाजरे का सोगरा और कैर-सांगरी: थार के पारम्परिक स्वाद में छुपा सेहत का राज

मिट्टी के चूल्हे पर सिका कड़क सोगरा, शुद्ध मक्खन और सूखी सांगरी की सब्जी—यह केवल खाना नहीं, मरुभूमि का अमृत है।

507 Head संपादकीय टीमUpdated: 16 अक्टूबर 202616 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन
पारंपरिक राजस्थानी थाली और बाजरे की रोटी

राजस्थान का खान-पान यहाँ की जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों की देन है। पश्चिमी राजस्थान में सदियों से बाजरा मुख्य अनाज रहा है। सर्दियों में बाजरे का मोटा सोगरा और गर्म राबड़ी शरीर को ऊर्जा और गर्माहट देती है।

खेजड़ी के वृक्ष पर लगने वाली सांगरी और कैर की झाड़ी से चुने गए छोटे फल बिना किसी रासायनिक खाद के प्राकृतिक रूप से तैयार होते हैं। इन्हें सुखाकर साल भर रखा जाता है और दही व मसालों के साथ पकाया जाता है।

आधुनिक पोषण विज्ञान भी मानता है कि बाजरे में भरपूर फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम होता है, जो मधुमेह और हृदय रोगों से बचाव में सहायक है।

507 हेड के गाँवों में आज भी मेहमानों का स्वागत मतीरे की सब्जी, काचरी की चटनी और ताजी छाछ से किया जाता है, जिसका स्वाद पाँच सितारा होटलों के खाने पर भी भारी पड़ता है।

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